चाहे हो रेत की मैदान या हो बर्फ का पहाड़
चाहे आए तूफान या हो पूस की ठंडी रात
खड़ा रहूंगा सरहद पर सीना ताने
चाहे हो गोलियों की बौछार या हो बम की बरसात।
रूह न कांपेगा मेरा
लहू के कतरा-कतरा निछावर के समय
ये वतन की मिट्टी, जो इतनी सुगंधित है
कि मिल जाए मेरा लहू इस मिट्टी में
तो अफ़सोस न करूं देह निछावर के समय।
पहुंचा देना यह संदेश
इंतजार में बैठे, मेरे घरवालों को
ताकि गर्व से सीना तान सके
मेरे अंतिम संस्कार के समय।
--------------------- 🪖 जय हिन्द 🪖 ---------------------