Saturday, November 26, 2022

बोझ तले बचपन

                 😔 बोझ तले बचपन 😔

रंगो से भरा स्वप्न था, खुशियों से भरा बचपन
जो सर पर थे हाथ तुम्हारे, नाही थे कोई गम
पर विधि को थी ना मंजूर, जो हमारी मुस्कान
कांटो से हुई सामना हमारी, और सुना पड़ा बचपन।

तुम जो गए छोड़ हमें, अल्हड़ पड़ा बचपन
बिन तुम्हारे पापा हमें, खलते हैं त्योहारों के दिन
डूबा हुआ है अभी-भी, उन यादों में मेरा मन
जो जीचाहे अब करूं, होत अनुशासनहीन मेरा बचपन।

मां भी थोड़ी अब गुमसुम रहती, नाही कोई बात बताती
देख आंसू मैं घबराती, पर नाही कुछ समझ में आती
मैं भी कामों में हाथ बटाती, बड़े मुश्किल से घर चलाती
भर आती आंखे मेरी, और सुना पड़ा बचपन।

किससे व्यथा बताएं अपनी, किससे बांटू खुशियां
रह गए धरे स्वप्न हमारे, और सुना पड़ा बचपन...!

महज 23 के बाली उमर में

                महज 23 के बाली उमर में वो चढ़ गया फांसी हँसते-हँसते, महज़ तेईस की बाली उमर में, सब कुछ लुटा दिया वतन पे उसने, न खौ...