अतीत का फैशन
अस्सी का दशक आज बड़ा खूबसूरत लग रहा है
हमने कहाँ उनकी तंगी देखी,
सिर्फ़ दीवारों पर लटकी उनकी तस्वीरें देखी
जिस सादगी में हमारी पिछली पीढ़ी ने
अभावों का एक उम्र गुज़ार दी
उसे हम आज फ़ैशन का ट्रेंड समझ अपनी पीढ़ी की समझदारी समझ बैठे।
कभी इन ट्रेंडों की चकाचौंध से फ़ुर्सत मिले,
तो उनकी झुर्रियों में झाँककर देख लेना
शायद आज भी वहीं टँगी मिले
तंगी, फटेहाली और दो जून की रोटी में सिमटा
वह लाचार अतीत, मूल सुविधाओं से दूर
जिसे उन्होंने हंसकर जिया था…
और जिसे हम आज बड़े शौक़ AI से पहन रहे हैं!
आज हर हाथ में मोबाइल है
फिर भी सुकून की तलाश रीलों में है
और एक वो दौर था
जब खाली हाथों में भी अपनापन था,
सादगी में ही मनोरंजन था,
और भाईचारे की महफ़िलों में
लोग अपनी शामें ढूँढ़ लिया करते थे।
हमने साधन तो अनगिनत जुटा लिए,
मगर शायद जीने के बहाने कहीं खो दिए।
✍️ Karan
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