Tuesday, May 16, 2023

कर्मभूमि कर्मठ जन की

                  कर्मभूमि कर्मठ जन की 

एक नया भारत बनाने की मन में हमने ठानी है
जहाँ सतत् विकास हो और घर-संसार खुशहाल हो
जाति धर्म भेद मिटाकर अखंड भारत का निर्माण हो
विकसित भारत का दुनियां में अपनी एक पहचान हो।

जो कभी झुके नहीं, मंजिल से पहले रुके नहीं
हासिल होंगे हर मुकाम और पूरे होंगे अरमान
भुला ना सकेगा देश उन वीरों के बलिदान को
तोड़ गुलामी की बेड़ियां बनायी जिसने यह पहचान।

नफ़रत की दीवार तोड़कर प्रेम की गंगा बहाएंगे
सबको दिलों में फिर से, एकता का दीप जलाएंगे
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सबने एकता दिखाई है
तिरंगा हमारी शान है राष्ट्रीय गीत पहचान है।

जिस धरती पर जन्म लिया वह धरती सबकी माता है
कर्मभूमि कर्मठ जन की अपना धर्म निभाना है
नागरिकों में कर्तव्य भावना देशभक्ति का पाठ पढ़ाती है
खुशहाल वतन और समाज को एक नया दिशा दे जाती है। 


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