Saturday, April 29, 2023

उम्र आज कल

                     उम्र आज कल

कहते है उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटा नहीं करता है
ये उम्र है, रोज हाथ से रेत सी फिसलती जाती है
ये उम्र तो बस तजुर्बों की कहानी है
जीवन के सफ़र में यादें पुस्तक बन जाती है।

एक उम्र वो थी जादू में भी यकीन हुआ करता था
एक उम्र ये है कि हकीकत पर भी शक होता है
कुछ खास नहीं बदलता उम्र बढ़ने के साथ
बस बचपन की जिदें समझौतों में बदल जाती है।

हर दिल में दर्द और आँखों में पानी है
कोई छुपाता, तो कोई दिखलाता है
इक उम्र के बाद उस उम्र की बातें उम्र भर याद आती है
पर वो उम्र फिर उम्र भर वापिस नहीं आती है।

यें उम्र तो बस कटती है दो अल्फ़ाज में
एक आस में तो कभी काश में
हर उम्र का होता है शौक़ जुदा
खिलौने,माशूक़ा,रुतबा, और ख़ुदा…!

बचपन जवानी बुढ़ापा जिंदगी के है पड़ाव हमारे
ज्यों ज्यों उम्र बढ़ती जाए समझदारी भा जाती है
ठोकरें खाकर दुनिया में अकल भारी आ जाती है
जीवन के सफ़र में यादें पुस्तक बन जाती है।

No comments:

Post a Comment

महज 23 के बाली उमर में

                महज 23 के बाली उमर में वो चढ़ गया फांसी हँसते-हँसते, महज़ तेईस की बाली उमर में, सब कुछ लुटा दिया वतन पे उसने, न खौ...