Friday, February 24, 2023

बचपन के दिन

                        बचपन के दिन 

शहर की भीड़ से दूर चलते है
चलो अपनों के पास गांव चलते है।

चलो उन हसीन लम्हों को याद करते है
वही मस्त बचपन की ओर लौटते है।

मां के उन लोरियों को याद करते है
दादी-नानी के परियों की कहानियों में लौटते है।

चलो वही सुनसान पड़ी गलियों में जाते है
जहां यारों संग गुल्ली-डंडे-कंचे खेला करते थे।

चलो मिलकर पत्थर उछालते है
शाखाओं से कुछ आम तोड़ते है।

चलो मिट्टी के खिलौने बनाते है
बेझिझक मिट्टी में लोट पोट होते है।

चलो बेफिक्र जिंदगी जीते है
चलो मस्त बचपन की ओर लौटते है।

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