Saturday, May 20, 2023

Childhood Memories

                  Childhood Memories 

Those were beautiful days
Only food, fun and play
Tension free all the ways
In the night, while feeding me
My mother used to tell me stories
I don't remember but she says

There were no sorrow, nor grief
Earlier we slept on mother's lap
In friendship, neither deceit nor gap
When we used to play cop and thief
There were no thoughts of profit and loss
Oh! How beautiful those days!

There were wonderful days
Neither fear of exam, nor any stress
Fighting with siblings and crocodile tears were usual
But bonding of love was stronger and deeper
If realising those moments, enough to bring smile
Oh! How beautiful those reminisces!

Tuesday, May 16, 2023

कर्मभूमि कर्मठ जन की

                  कर्मभूमि कर्मठ जन की 

एक नया भारत बनाने की मन में हमने ठानी है
जहाँ सतत् विकास हो और घर-संसार खुशहाल हो
जाति धर्म भेद मिटाकर अखंड भारत का निर्माण हो
विकसित भारत का दुनियां में अपनी एक पहचान हो।

जो कभी झुके नहीं, मंजिल से पहले रुके नहीं
हासिल होंगे हर मुकाम और पूरे होंगे अरमान
भुला ना सकेगा देश उन वीरों के बलिदान को
तोड़ गुलामी की बेड़ियां बनायी जिसने यह पहचान।

नफ़रत की दीवार तोड़कर प्रेम की गंगा बहाएंगे
सबको दिलों में फिर से, एकता का दीप जलाएंगे
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सबने एकता दिखाई है
तिरंगा हमारी शान है राष्ट्रीय गीत पहचान है।

जिस धरती पर जन्म लिया वह धरती सबकी माता है
कर्मभूमि कर्मठ जन की अपना धर्म निभाना है
नागरिकों में कर्तव्य भावना देशभक्ति का पाठ पढ़ाती है
खुशहाल वतन और समाज को एक नया दिशा दे जाती है। 


Saturday, April 29, 2023

उम्र आज कल

                     उम्र आज कल

कहते है उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटा नहीं करता है
ये उम्र है, रोज हाथ से रेत सी फिसलती जाती है
ये उम्र तो बस तजुर्बों की कहानी है
जीवन के सफ़र में यादें पुस्तक बन जाती है।

एक उम्र वो थी जादू में भी यकीन हुआ करता था
एक उम्र ये है कि हकीकत पर भी शक होता है
कुछ खास नहीं बदलता उम्र बढ़ने के साथ
बस बचपन की जिदें समझौतों में बदल जाती है।

हर दिल में दर्द और आँखों में पानी है
कोई छुपाता, तो कोई दिखलाता है
इक उम्र के बाद उस उम्र की बातें उम्र भर याद आती है
पर वो उम्र फिर उम्र भर वापिस नहीं आती है।

यें उम्र तो बस कटती है दो अल्फ़ाज में
एक आस में तो कभी काश में
हर उम्र का होता है शौक़ जुदा
खिलौने,माशूक़ा,रुतबा, और ख़ुदा…!

बचपन जवानी बुढ़ापा जिंदगी के है पड़ाव हमारे
ज्यों ज्यों उम्र बढ़ती जाए समझदारी भा जाती है
ठोकरें खाकर दुनिया में अकल भारी आ जाती है
जीवन के सफ़र में यादें पुस्तक बन जाती है।

Friday, February 24, 2023

बचपन के दिन

                        बचपन के दिन 

शहर की भीड़ से दूर चलते है
चलो अपनों के पास गांव चलते है।

चलो उन हसीन लम्हों को याद करते है
वही मस्त बचपन की ओर लौटते है।

मां के उन लोरियों को याद करते है
दादी-नानी के परियों की कहानियों में लौटते है।

चलो वही सुनसान पड़ी गलियों में जाते है
जहां यारों संग गुल्ली-डंडे-कंचे खेला करते थे।

चलो मिलकर पत्थर उछालते है
शाखाओं से कुछ आम तोड़ते है।

चलो मिट्टी के खिलौने बनाते है
बेझिझक मिट्टी में लोट पोट होते है।

चलो बेफिक्र जिंदगी जीते है
चलो मस्त बचपन की ओर लौटते है।

Tuesday, February 14, 2023

पुलवामा हमला में शहीद अमरजवानों को मेरा श्रद्धांजलि🙏😭 🇮🇳 भारत मां के लाल हम 🇮🇳

 
            🇮🇳 भारत मां के लाल हम 🇮🇳

भारत के अंदर जो भी
गद्दारों की टोली है
खा कर भारत की रोटी
पाक की वो हमजोली है।

नमकहरामो की बस्ती में
सांप-सपोले रहते है
जिन हाथों में पुस्तक होती
बम गोले बोते है।

धोखे से करके वार तुम
बहादुरी अपनी बताते हो
हिम्मत है तो सामने आओं
फिर तुमको मज़ा चखाते है।

वीर शहीदों की कुर्बानी 
यूं न खाली जाने देंगे
भारत मां के लाल है हम
गिन गिन कर बदला लेंगे हम।

तुम्हारे नापाक इरादों को
पूरा कभी न होने देंगे हम
मातृभूमि की रक्षा के खातिर
जान निछावर कर देंगे हम।

Saturday, January 21, 2023

सफ़र सपने पाने की

                   सफ़र सपने पाने की

सपने देख हम, गांव से शहर को चले
ना कोई थी तजुर्बा, फिर भी हम शहर को झेले
मिलते थे बड़े आराम से, जो दो वक्त के रोटी
वो भी हमें अब, बड़े मुश्किल से बनाने को पड़े।

चैन गई, निंद उड़े, कहां गए अब वो यारों के संग
बस जिंदगी गुज़र रही है, बड़े मुश्किल से कठिनाइयों के संग
कि परिंदे भी नहीं रहते, पराये के आशियानों में
हम जिंदगी गुजार रहे हैं, किराए के मकानों में।

चूक होता जब भी, सलेक्शन पाने में
असमर्थ होता हूं तब, घरवालों को समझाने में
जो सपने देखें थे हमने, बेताब है मंजिल पाने को
सपने पूरे करने है घरवालों के, जो डूबे है कर्ज में हमें बनाने को।

Saturday, November 26, 2022

बोझ तले बचपन

                 😔 बोझ तले बचपन 😔

रंगो से भरा स्वप्न था, खुशियों से भरा बचपन
जो सर पर थे हाथ तुम्हारे, नाही थे कोई गम
पर विधि को थी ना मंजूर, जो हमारी मुस्कान
कांटो से हुई सामना हमारी, और सुना पड़ा बचपन।

तुम जो गए छोड़ हमें, अल्हड़ पड़ा बचपन
बिन तुम्हारे पापा हमें, खलते हैं त्योहारों के दिन
डूबा हुआ है अभी-भी, उन यादों में मेरा मन
जो जीचाहे अब करूं, होत अनुशासनहीन मेरा बचपन।

मां भी थोड़ी अब गुमसुम रहती, नाही कोई बात बताती
देख आंसू मैं घबराती, पर नाही कुछ समझ में आती
मैं भी कामों में हाथ बटाती, बड़े मुश्किल से घर चलाती
भर आती आंखे मेरी, और सुना पड़ा बचपन।

किससे व्यथा बताएं अपनी, किससे बांटू खुशियां
रह गए धरे स्वप्न हमारे, और सुना पड़ा बचपन...!

अतीत का फैशन

                    अतीत का फैशन अस्सी का दशक आज बड़ा खूबसूरत लग रहा है हमने कहाँ उनकी तंगी देखी, सिर्फ़ दीवारों पर लटकी उनकी तस्वीरें देखी ...